
ऐम ह्रीम श्रीम ऐम श्रीम आपदुद्धारणाय ह्रांम् ह्रीम ह्रूम अजामलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्रय विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीम ह्रीम ऐम ( वेदोक्त )
ऐंग ह्रींग श्रींग ऐंग श्रींग आपदुद्धारणाय ह्रांग ह्रींग ह्रूंग अजामलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्रय विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रींग ह्रींग ऐंग ( तंत्रोक्त )
ऐंग ह्रींग श्रींग ऐंग श्रींग आपदुद्धारणाय ह्रांग ह्रींग ह्रूंग अजामलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय मम दारिद्रय विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रींग ह्रींग ऐंग ( तंत्रोक्त )
